[1] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 212، الروضة البهية في شرح اللمعة الدمشقية، للشهيد الثاني، 1/ 44
[2] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 213، غنائم الأيام في مسائل الحلال والحرام، للميرزا القمي، 1/ 29
[3] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 212
[4] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 212
[5] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 214
[6] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 213، مستدرك الوسائل، للنوري الطبرسي، 10/ 205
[7] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 213، مستدرك الوسائل، للنوري الطبرسي، 10/ 205
[8] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 213، مستدرك الوسائل، للنوري الطبرسي، 10/ 205
[9] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 213، مستدرك الوسائل، للنوري الطبرسي، 10/ 205
[10] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 213، مستدرك الوسائل، للنوري الطبرسي، 10/ 205
[11] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 213، مستدرك الوسائل، للنوري الطبرسي، 10/ 205
[12] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 215
[13] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 215
[14] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 215
[15] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 215
[16] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 216
[17] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 216
[18] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 216
[19] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 216
[20] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 216، مستدرك الوسائل، للنوري الطبرسي، 10/ 368
[21] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 216
[22] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 216
[23] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 216
[24] بحار الأنوار، للمجلسي، 57/ 218
[25] الذريعة، لآقا بزرگ الطهراني، 16/ 271
[26] الذريعة، لآقا بزرگ الطهراني، 16/ 271
[27] الذريعة، لآقا بزرگ الطهراني، 26 / 80
[28] الذريعة، لآقا بزرگ الطهراني، 11/ 51
[29] الذريعة، لآقا بزرگ الطهراني، 3/ 460
[30] الذريعة، لآقا بزرگ الطهراني، 16/ 263