[1] أنظر : تقريب التقريب، لإبن حجر العسقلاني، 1/ 411
[2] تهذيب الكمال، للمزي، 12/ 351
[3] معجم رجال الحديث، للخوئي، 10/ 14
[4] بحار الأنوار، للمجلسي، 44/ 349
[5] بحار الأنوار، للمجلسي، 45/ 20
[6] بحار الأنوار، للمجلسي، 45/ 21
[7] بحار الأنوار، للمجلسي، 45/ 54
[8] الكافي، للكليني، 3/ 490
[9] بحار الأنوار، للمجلسي، 45/ 357
[10] بحار الأنوار، للمجلسي، 45/ 368